नमो महावदान्याय कृष्ण प्रेम प्रदायते।
कृष्णाय कृष्ण चैतन्य नाम्ने गौरत्विषैः नमः ॥
अनन्त कोटि ब्रह्माण्डों में यदि जीव के सच्चे मित्र हैं, तो वे केवल भगवान श्रीकृष्ण और उनके भक्त वैष्णवजन ही हैं। जीव की सबसे महान सम्पत्ति कृष्ण प्रेम है। भगवान श्रीकृष्ण ने अनेको अवतारों में असुरों को मोक्ष, वैकुण्ठ और गोलोक की गति दी, किन्तु कृष्ण प्रेम नहीं दिया।
इसी कृष्ण प्रेम को प्रदान करने के लिए स्वयं श्री राधा कृष्ण ने कलियुग में श्रीमन चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतार लिया। उन्होंने बिना भेदभाव के—ब्राह्मण, चाण्डाल, पशु-पक्षी सभी को कृष्ण प्रेम का अमूल्य धन प्रदान किया।
चैतन्य महाप्रभु जी 18 फरवरी 1486 में पश्चिम बंगाल के नवद्वीप धाम मायापुर में श्री शची माता और जगन्नाथ मिश्र जी के घर पर प्रकट हुए।



